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Corona के डर से कैसे बचा जाए...?

Corona  के डर से कैसे बचा जाए...?


क्योंकि वायरस से बचना तो बहुत ही आसान है,

लेकिन जो डर आपके और दुनिया के अधिकतर लोगों के भीतर बैठ गया है, उससे बचना बहुत ही मुश्किल है।

अब इस महामारी से कम लोग, इसके डर के कारण लोग ज्यादा मरेंगे.......।

’डर’ से ज्यादा खतरनाक इस दुनिया में कोई भी वायरस नहीं है।




इस डर को समझिये,
अन्यथा मौत से पहले ही आप एक जिंदा लाश बन जाएँगे।

यह जो भयावह माहौल आप अभी देख रहे हैं, इसका वायरस आदि से कोई लेना देना नहीं है।

यह एक सामूहिक पागलपन है, जो एक अन्तराल के बाद हमेशा घटता रहता है, कारण बदलते रहते हैं, कभी सरकारों की प्रतिस्पर्धा, कभी कच्चे तेल की कीमतें, कभी दो देशों की लड़ाई, तो कभी जैविक हथियारों की टेस्टिंग!!

इस तरह का सामूहिक पागलपन समय-समय पर प्रगट होता रहता है। व्यक्तिगत पागलपन की तरह कौमगत, राज्यगत, देशगत और वैश्विक पागलपन भी होता है।

इस में बहुत से लोग या तो हमेशा के लिए विक्षिप्त हो जाते हैं या फिर मर जाते हैं ।

ऐसा पहले भी हजारों बार हुआ है, और आगे भी होता रहेगा और आप देखेंगे कि आने वाले बरसों में युद्ध तोपों से नहीं बल्कि जैविक हथियारों से लड़ें जाएंगे।

हर समस्या मूर्ख के लिए डर होती है, जबकि ज्ञानी के लिए अवसर!!

इस महामारी में आप घर बैठिए, पुस्तकें पढ़िए, शरीर को कष्ट दीजिए और व्यायाम कीजिये, फिल्में देखिये, योग  कीजिये और एक माह में 15 किलो वजन घटाइए, चेहरे पर बच्चों जैसी ताजगी लाइये
अपने शौक़ पूरे कीजिए।

मुझे अगर 15 दिन घर  बैठने को कहा जाए तो में इन 15 दिनों में 30 पुस्तकें पढूंगा और नहीं तो एक बुक लिख डालिये, इस महामन्दी में पैसा इन्वेस्ट कीजिये, ये अवसर है जो बीस तीस साल में एक बार आता है पैसा बनाने की सोचिए....क्युं बीमारी की बात करके वक्त बर्बाद करते हैं...

ये ’भय और भीड़’ का मनोविज्ञान सब के समझ नहीं आता है।

’डर’ में रस लेना बंद कीजिए...

आमतौर पर हर आदमी डर में थोड़ा बहुत रस लेता है, अगर डरने में मजा नहीं आता तो लोग भूतहा फिल्म देखने क्यों जाते?

यह सिर्फ़ एक सामूहिक पागलपन है जो अखबारों और TV के माध्यम से भीड़ को बेचा जा रहा है...

लेकिन सामूहिक पागलपन के क्षण में आपकी मालकियत छिन सकती है...आप महामारी से डरते हैं तो आप भी भीड़ का ही हिस्सा है

TV पर खबरे सुनना या अखबार पढ़ना बंद करें

ऐसा कोई भी विडियो या न्यूज़ मत देखिये जिससे आपके भीतर डर पैदा हो...

महामारी के बारे में बात करना बंद कर दीजिए,

डर भी एक तरह का आत्म-सम्मोहन ही है।

एक ही तरह के विचार को बार-बार घोकने से शरीर के भीतर रासायनिक बदलाव  होने लगता है और यह रासायनिक बदलाव कभी कभी इतना जहरीला हो सकता है कि आपकी जान भी ले ले;

महामारी के अलावा भी बहुत कुछ दुनिया में हो रहा है, उन पर ध्यान दीजिए;

ध्यान-साधना से साधक के चारों तरफ  एक प्रोटेक्टिव Aura बन जाता है, जो बाहर की नकारात्मक उर्जा को उसके भीतर प्रवेश नहीं करने देता है,
अभी पूरी दुनिया की उर्जा नाकारात्मक  हो चुकी  है.......

ऐसे में आप कभी भी इस ब्लैक-होल में  गिर सकते हैं....ध्यान की नाव में बैठ कर हीं आप इस झंझावात से बच सकते हैं।

शास्त्रों का अध्ययन कीजिए,
साधू-संगत कीजिए, और साधना कीजिए, विद्वानों से सीखें

आहार का भी विशेष ध्यान रखिए, स्वच्छ जल पीए,

अंतिम बात:
धीरज रखिए... जल्द  ही सब कुछ बदल जाएगा.......

जब  तक मौत आ ही न जाए, तब तक उससे डरने की कोई ज़रूरत नहीं है और जो अपरिहार्य है उससे डरने का कोई अर्थ भी नहीं  है,

डर एक  प्रकार की मूढ़ता है, अगर किसी महामारी से अभी नहीं भी मरे तो भी एक न एक दिन मरना ही होगा, और वो एक दिन कोई भी  दिन हो सकता है, इसलिए विद्वानों की तरह जीयें, भीड़ की तरह  नहीं!!"

TV news and Corona


TV news and Corona

दोस्तों, मै डा. जोषी कुछ दिलचस्प बातें बताने जा रहा हूं।  Tv के ऊपर करोना से मौत के आंकड़े दिखाएं जा रहे हैं। लेकिन उनसे डरे नहीं।

सामान्य जीवन में जन्म और मृत्यु का अनुपात हम देखेंगे।

विश्व में हर सेकंड 4 बच्चे जन्म लेते हैं। मतलब करीब 3 लाख 53 हजार प्रतिदिन

भारत देश की बात करे तो हर रोज 49,481 यानी करीब पचास हजार बच्चे जन्म लेते हैं।

और कुदरतन  हर रोज 14,475 लोगोंकी मौत हो जाती है।

पिछले 34 दिनों में भारत में 16,82,354 यानी करीब 17 लाख बच्चों ने जन्म लीया है।

और पूरे विश्व में सवा करोड़ बच्चों ने जन्म लिया है।

निश्चिंत रहिए, सावधान रहिए। यह विश्व का अंत नहीं है ना मनुष्य जाति का अंत है।

कोरोना तो चला जाएगा...

कोरोना तो चला जाएगा... 


लेकिन अलग अलग प्रकार के कुदरत के प्रकोप हमें देखने के लिए मिलेंगे..

ऑस्ट्रेलिया ने ही आग का दानव देखा...

भारत में तीन दिन पहले काझिरंगा सेंच्युरी में करीब चालीस हजार प्राणी गूढ़ बीमारी से मर गए।

आसमान से उल्का पिंड पृथ्वी की तरफ आ रहे हैं। अप्रैल में भी एक आया था लेकिन उसकी दिशा बदल गई।

किन्तु इससे विचलित होने की जरूरत नहीं है। हम लोग उल्टे भाग्यशाली है कि इन प्राकृतिक आपदाओंको हम देखेंगे और जीयेंगे भी।

इस दुनिया की चार प्रजाति कभी भी नष्ट नहीं होती। 1. मनुष्य, 2. कोंकरोच, 3. मच्छर, 4. चूहे

कोरोना वायरस एलियन एटेक है। एक ऐसा दानव जो दूसरे ग्रह से आया है। यह दानव अदृश्य है। यह किसी भी मनुष्य के शरीर का रूप धारण कर लेता है। कई दिनों तक वो चुपके से अंदर देखता है कि उस मनुष्य के कर्म, और अंतरात्मा की ताकत कितनी है। जो दोनों में कमजोर है उनको यह राक्षस खत्म करता है। जिनके कर्म अच्छे, जो आध्यात्मिक उन्नति के राह पर है उनका शरीर इसे छोड़ना पड़ता है।

किन्तु अहंकारी मनुष्य को यह छोड़ता नहीं। जितने लोग अहंकारी, भगवान को ना मानने वाले होते हैं उनके शरीर को यह दानव निगल जाता है। जो लोग हररोज भगवान की शरण में है।

दिया, धूप, अगरबत्ती,  करते हैं उनके आस पास भी यह राक्षस नहीं भटकता। यह दानव किसी संत महात्मा मुनि ध्यानी का कुछ नहीं बिगाड़ सका है।

यह राक्षस सोच सकता है, यह डरता है। इसको चैलेंज नहीं करना है। चैलेंज अहंकार की निशानी होती है। अपने घर में हर रोज दिया, धूप अगरबत्ती कीजिए। भगवान के शरण में रहिए। यह भाग जाएगा। इसका पेट भर रहा है। इसकी भूख मिटते ही वो चला जाएगा। केवल ध्यान रहे हमे इसका भोजन नहीं बनना है।

इस राक्षस के बाद दूसरे एलियंस, पर ग्रही जीव आएंगे.. मालूम नहीं कब लेकिन वो आएंगे। हम उन्हें देखेंगे, वो हमारे साथ रहेंगे।
करोना भी सम्पूर्णता नहीं जाएगा। वो हमारे साथ रहेगा और हम उनके साथ रहेंगे।

मजेदार बात है, टीबी, पोलियो जैसे दानव हमारे शरीर में छुपे हैं। लेकिन इस समय हमारा डीएनए भगवान ने ऐसा बदला की हमें उन राक्षसो का एहसास भी नहीं होता है। उसी प्रकार से हम इस राक्षस को भी मेहमान बनाकर रखेंगे। और वो किसी की जान नहीं लेगा तो उसे कोई भारतीय बंदा नहीं छेड़ेगा।

क्योंकि यह भूमि करुणा मई महावीर स्वामी की है, भगवान बुद्ध की है, कृष्ण कन्हैया की है। सब प्रेम से रहेंगे।

किसी को कुछ नुकसान नहीं होगा। ✋🏻जिंदगी चलती रहेगी। डर के आगे जीत है। मुस्कुराते रहिए🙂😊☺️😄😁😆✋🏻

क्या भूत प्रेत आत्मा की बाधा रेकी या हिप्नोथेरपी से सम्पूर्ण ठीक होती है?


 

क्या भूत प्रेत आत्मा की बाधा

रेकी या हिप्नोथेरपी से सम्पूर्ण ठीक होती है?

 

भूत प्रेत आत्मा या यू कहे उसका 'वहम', क्योंकि मॉडर्न साइंस 'भूत प्रेत आत्मा के प्रभाव' को नकारता है|

 इसलिए इस विषय पर लोग खुल्ले होकर बात करना नही चाहते| लेकिन हजारो लोगोंको यह तकलीफ रहती है| 

कई बार लोग बाबा भगत के चंगुल में फस जाते है| कई बार उनसे ठीक भी हो जाते है | 

भूत प्रेत आत्मा पर विश्वास  रखना या उसकी बाते करना लोग अंधश्रद्धा समझते है| 

मै तो यह मानता हू, की  भूत प्रेत आत्मा का प्रभाव सत्य भी है, और मानसिक वहम भी |

 किन्तु सत्य और भ्रम इसका फर्क ढूँढ़कर निकालना एक हिप्नोटिस्ट ही कर सकता है| 

यानी हिप्नोटिस्ट थोड़ा बाबा भगत और बहुत ज्यादा डाक्टर होता है|  

पेशंट ठीक हो जाता है यही सत्य है| बाक़ी सही क्या गलत क्या इसकी चर्चा में मै पड़ना नही चाहता | 

MBBS सायकियाट्री पेशंट को मूर्ख कहते है, जिससे पेशंट की दलील होती है, की भूत मुझे सता रहा है| तुम्हे क्या?

 डाक्टर दवाईया देते रहते है| लेकिन उसका असर पेशंट पर नही होता| 

पेशंट को एक ज़िंदा लाश बनाकर रख दिया जाता है| घर के लोग पेशंट शांत रहता है, इसी में संतोष मान लेते है| 

हिप्नोसिस और रेकी पेशंट के मन में आनंद पैदा करता है| रेकी मन शरीर और अंतरात्मा की ऊर्जा को बढाता है| 

रेकी एव हिप्नोटीजम का कोई साइड इफेक्ट नही होता | इस ट्रीटमेंट में  किसी प्रकार की कोई दवा नही दी जाती है| 

अगर कोई पेशंट दवाईया ले रहा है तो ले सकता है| उन दवाईयोंका और हिप्नोटीजम एव रेकी के ट्रीटमेंट का कोई सीधा सम्बन्ध नही है| 

डा. जोषी जी से जरूर रेकी एव हिप्नोटीजम के विषय में चर्चा करे|  अभी कोल करे 9723106181.

क्या स्क्रिजोफेनिया जैसी मानसिक बीमारी रेकी या हिप्नो थेरपी से सम्पूर्ण ठीक होती है?





क्या स्क्रिजोफेनिया जैसी मानसिक बीमारी रेकी या हिप्नो थेरपी से ठीक होती है?

हां स्क्रिजोफेनिया जैसी मानसिक बीमारी रेकी या हिप्नो थेरपी से कंट्रोल होती है |

यह एक लम्बी प्रक्रिया होती है किन्तु पेशंट का बेलेंस ऑफ़ माइंड लम्बे समय तक ठीक रहता है| 

कैसे ठीक हो जाता है, इसका उत्तर साइंस के पास भी नही है |
स्क्रिजोफेनिया में MBBS सायकियाट्री की ट्रीटमेंटके साथ हिप्नोटिक उपचार एव रेकी उपचार किये जाते है| 

पेशंट के मन में भ्रम की अवस्था को ख़त्म करके वास्तविकता का ज्ञान दिया जाता है | 

उससे भी ज्यादा घर के अन्य सदस्योंको रेकी दी जाती है, की ऐसे पेशंट को कैसे हेंडल किया जाता है| कुल मिलाकर घर का वातावरण शान्त हो जाता है| 

हिप्नोसिस और रेकी पेशंट के मन में आनंद पैदा करता है| रेकी मन शरीर और अंतरात्मा की ऊर्जा को बढाता है|
रेकी एव हिप्नोटीजम का कोई साइड इफेक्ट नही होता |

 इस ट्रीटमेंट में  किसी प्रकार की कोई दवा नही दी जाती है| अगर कोई पेशंट दवाईया ले रहा है तो ले सकता है| उन दवाईयोंका और हिप्नोटीजम एव रेकी के ट्रीटमेंट का कोई सीधा सम्बन्ध नही है| 

डा. जोषी जी से जरूर रेकी एव हिप्नोटीजम के विषय में चर्चा करे| अभी कोल करे 9723106181. 

क्या हिस्टेरिया जैसी मानसिक बीमारी रेकी या हिप्नो थेरपी से सम्पूर्ण ठीक होती है?


 

क्या हिस्टेरिया जैसी मानसिक बीमारी रेकी या हिप्नो थेरपी से सम्पूर्ण ठीक होती है?

हां हिस्टेरिया जैसी मानसिक बीमारी रेकी या हिप्नो थेरपी से सम्पूर्ण ठीक होती है |

 यह एक लम्बी प्रक्रिया होती है किन्तु पेशंट ठीक हो जाता है यही सत्य है| 

कैसे ठीक हो जाता है, इसका उत्तर साइंस के पास भी नही है | 

MBBS सायकियाट्री डाक्टर पेशंट को दवाईया देते रहते है| 

लेकिन उसका असर पेशंट पर नही होता| पेशंट को एक ज़िंदा लाश बनाकर रख दिया जाता है| 

घर के लोग पेशंट शांत रहता है, इसी में संतोष मान लेते है| 

पेशंट को दस बारह साल तक दवाईया दी जाती है| 

डाक्टर बदलते रहते है, किन्तु पेशंट में कोई सुधार नही आता| 

हिप्नोसिस और रेकी पेशंट के मन में आनंद पैदा करता है| 
रेकी मन शरीर और अंतरात्मा की ऊर्जा को बढाता है| 

रेकी एव हिप्नोटीजम का कोई साइड इफेक्ट नही होता | 

इस ट्रीटमेंट में  किसी प्रकार की कोई दवा नही दी जाती है| अगर कोई पेशंट दवाईया ले रहा है तो ले सकता है| 

उन दवाईयोंका और हिप्नोटीजम एव रेकी के ट्रीटमेंट का कोई सीधा सम्बन्ध नही है| 

डा. जोषी जी से जरूर रेकी एव हिप्नोटीजम के विषय में चर्चा करे| अभी कोल करे 9723106181.  

कोरोना के कारण घर पर बैठकर रेकी एव हिप्नोटीजम सीखिए


 

 

कोरोना के कारण घर पर बैठकर रेकी एव हिप्नोटीजम सीखिए

 

समय का सद उपयोग कीजिए | कोरोना वायरस से मत डरिये| कोरोना वायरस को सकारात्मक रीति से देखा तो पता चलता है की शहर के शहर रुक गए है | तो ध्वनि प्रदुषण हवा का प्रदुषण रुक गया है | माता पिता बच्चोंको समय नही दे रहे थे, वो घर में रुककर बच्चोंके साथ समय बिता रहे है|

 बच्चोंको स्कूल के अतिरिक्त बोझ से आजादी मिल गई है | बोर्ड के परिक्षार्थियोंको पता चल रहा है, की परीक्षा से भी कठिन और भी कुछ है| इंसान को जो लगता था की अमुक कुछ चीजोंके बगैर वो ज़िंदा नही रह सकता वो सब थम गया है | जैसा की ओनलाईन पिज्झा मंगवाना, रास्ते पर पानीपूरी, आईस्क्रीम खाना

करोना की वजह से एक तो अच्छा हुआ की महिलाओंको 'मनचले' गंदे स्पर्श कर के परेशान कर रहे थे वो रुक गया|
घर में बैठकर लोग मनचाही चीजे सीख रहे है| औरते नई रेसीपीज, गाना, संगीत सीख रहे है | मर्द किताबे पढ़ रहे है| बच्चे पुन: एक बार हिंदुस्थानी खेल खेल रहे है, जैसे की अन्ताक्षरी, चिड़िया ऊड, केरम, चेस| माँ (ओं) की एक फ़िक्र ख़त्म हो गई की बच्चा स्कुल गया है या पति ऑफिस गए है.. अब तक क्यों नही आये

पति पत्नी का प्रेम और बूढ़े माता पिता की खबर बात सब कुछ वैसा ही हो रहा है, जैसा कभी हजारो वर्ष पहले होता था | बहुत सारे लोग 'ओनलाईन ' कोर्स कर रहे है| आईये आप भी हमसे ओनलाईन रेकी एव हिप्नोटीजम सीखे , बिलकुल 5 दिनों में|
 अभी कोल करे 9723106181.

Corona के डर से कैसे बचा जाए...?

Corona  के डर से कैसे बचा जाए...? क्योंकि वायरस से बचना तो बहुत ही आसान है, लेकिन जो डर आपके और दुनिया के अधिकतर लोगों के भीतर बैठ गया...