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black money and Modiji, What is black money, how black money is created?

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एक गरीब ब्राम्हण का लेटर मोदिजी के नाम...

लोगोंके लिये पूजा पाठ करना यही हमारी रोजी रोटी है. पूजा मे सभी सामग्री के साथ एक चीज और रखी जाती है, वो है एक रुपिये से लेकर एक हजार तक का नोट...

आदरणीय प्रधान मंत्रीजी, हमारे यहा पैसे को “लक्ष्मी” यानी भगवान माना जाता है. आपके एक निर्णय ने लोगोंकी आस्था जिसमे है उसी भगवान के उपर के विश्वास को डगमगा दिया. आपके वित्त मंत्री जी अमेरिका स्विडन और ना जाने ऐसे देशोंके उदाहरण दे रहे है, जिनको कोई संस्कृती नही है. हमारी आस्था पैसे से अलग प्रकार से जुडी हुई है... पहली कमाई का नोट,पहला बक्षीस इ.इ. लोग जान से लगाकर रखते है. उसे चीज नही समझा जाता..

उस पैसे को कभी खर्चा नही जाता... और आप केशलेस सोसाईटी कि बात कर रहे है. आपको बता दू... दुनिया मे अगर मेटल सबसे ज्यादा कही पर संग्रहित है तो वो हमारे हिंदुस्तानी किचन मे है. क्यों, क्योंकी किसी भी गृहिणी ने उसे नही खरिदा.. उसे वो शादी मे गिफ्ट मिला.. भाई ने रक्षा बंधन मे दिया... अगर कल को देश के हित मे अगर आप किचन के बर्तन को मेटल के रूप मे देखने लगोगे... और उसे सरकार के पास जमा करने के लिये कहोगे.. तो ये हमारे संस्कृती के खिलाफ होगा.

उसी प्रकारसे सोना... सोने के साथ हमारी आस्था जुडी हुई होती है. कुछ लोग सोने को इंवेस्ट्मेंट टूल के जैसे देखते होंगे.. लेकिन करोडो लोगोंकी जिंदगी खत्म हो जाती है दस ग्राम सोना जुटाते जुटाते.. अगर कल आप सोने को बेन करोगे, तो हमारी आस्था को ठेस पहुचेगी...

आपके थिंक टेंक मे बिना सोच के लोग बैठे हुये है... जो ये ना समझ पाये कि भारतिय लोगोंके जीवन मे “करंसी” भगवान का रूप है. तो आपकी तथाकथित अर्थ क्रांती अब एक धार्मिक और सामाजिक प्रतिक्रांति के रूप मे खडी हो जायेगी. आपके इस कदम ने लोगोको दुविधा मे डाल दिया.. दिल और दिमाग कि दुविधा.. दिमाग कहता है, राष्ट्र हित मे सही है’, लेकिन अंदर से उसका दिल दुखता है, और कहता है, मेरे परिवार के लिये गलत है हो सकता है देश तो दिमाग से ही चलता है, भावनाओंसे नहीं... लेकिन.. हजारो दिल जब मिल जाते है तब प्रतिक्रांति आकार लेती है. क्या अब पूजा मे चेक या क्रेडिट कार्ड रखे जायेंगे?

कुछ चंद लोगोंके पास होगा भी कालाधन.. लेकिन उसके लिये आपने  देश के प्रॉडक्टिविटी के वर्किंग अवर्स लाईन मे वेस्ट करा दिये? आपके बोकिल सर जिनका यह दावा है कि इससे टेक्स वसूला जा रहा है.. उन्होने चाणक्य को पढा होगा.. कि लोग डर के मारे टेक्स भरते है वो देश और कंगाल हो जाता है, क्योंकी उसीका मतलब है कि देश चलाने वालोंके पास योग्य नीती नही है, जिससे लोगोमे देश प्रेम बढे और वो हसते हसते टेक्स जमा करे”. अगर बोकिलसर का यह दावा है कि हमारे पास दूसरी टेक्सेशन सिस्टम है, जो हम जल्द ही लागू करेंगे.. तो यह मुर्खता है. क्योंकी ऐसा अगर था तो पहले योग्य प्रणाली लागू करते फिर यह डिसिजन लेते.

करंसी कि कमी यह वित्त मंत्री का दोष है. रिजर्व बेंक का दोष है. थोडासा व्यक्तिगत होने कि अनुमती चाहुंगा, आदरणीय जेटली जी तो चुनाव हार गये थे... जहा पर उनकी लीडर शीप पर जनता ने ही लाल निशान लगा दिया ऐसे आदमी को आपने वित्त मंत्री बना दिया और वो करोडो भारतियोंके सब्र का इम्तेहान ले रहा है. (याद आ गया मुझे नेपोलियन का इतीहास, नेपोलियन बहोत बढिया योद्धा था और कुशल प्रशाशक. लेकिन उसने एक गलती की. जितना प्रदेश वो जीतता जाता अपने किसी रिश्तेदार या दोस्तको वहा का सरदार बना देता. अब मामला यु हुआ.. वाटर्लू कि लडाई मे वो हार रहा था.. और उसने चाहा कि मेरे रिश्तेदार मेरे दोस्त मेरी मदद करेंगे.. लेकिनवो ना तो योद्धा थे और ना ही प्रशाशक.. अंतिमत: इतने बडे सम्राट को जिंदगी की सबसे बडी हार हुई) 

नये नये गवर्नर बने आदरणीय पटेल साहब ने जरूरत से ज्यादा आत्म विश्वास दिखाया, जिसमे आप फस गये. क्योंकि उनको खुद को भी लगा था कि दो दिन मे मेंनेज हो जायेगा. लेकिन ऐसे होते हुये नजर नही आ रहा है. पटेल साहब को आये हुये चंद दिन ही हुये है. और उनकी साईन नोट पर है. जिसका दावा सरकार कर रही है कि छे महिने पह्ले से नोट प्रिंटिंग का काम चल रहा था.. अब पटेल साहब और राजन जी दोनो रिलायंस के एक्स एम्प्लोईज थे.. गुथ्थी कुछ समझ मे नही आ रही है. हमे एक इकोनोमिक्स समझा दीजिये.. लोगोंके पास पैसा है लेकिन खरिदारी के मूड मे नही है,
(क्योंकि सरकार से उनका विश्वास उड गया है) तो जो रेगुलर मार्केट मे चाय वाले से लेकर कपडे वाले तक का हर एक बिजनस तकरिबन तकरिबन बंद है. तो जो व्यवसायी टेक्स भर रहे उनका माल ऐसेही पडा है. (उनका बिजनस कम हो गये , उनका क्या कसूर था ) रोज के बिल बनने चाहिये थे वो बंद हो गये है. बिल ही नही बनेंगे तो टेक्स कहा से आयेगा.और ये रोज का कितना करोड का नुकसान होगा? क्योंकि यह मंदी की आर्टिफिशिअल स्थिती आनेवाले कुछ महीनों तक चलेगी.

लोग जो पैसा बेंक मे भर रहे है वो आकडा एक भ्रम है.क्योंकि उससे भी ज्यादा आनेवाले कुछ महिनोमे विड्रॉ भी होनेवाले है. रीयल इस्टेट मे कालाधन है ऐसा आपका मानना है. शायद इसमे कोई दो राय नही है. लेकिन जिन लोगोने खून पसीना एक करके अपने बीस साल के लोन को चुकता किया है. उनको आप सजा दे रहे है. बिल्डर्स के उपर डायरेक्ट एक्शन लेकर उनका काला धन बाहर निकालिये. कितना फालतू का विचार है, कि कोई बिल्डर साढे चार हजार कि नोट बदलवाने आयेगा.

आपका थिंकटेंक कह रहा है कि इससे रियल इस्टेट के दाम घटेंगे. इनको इकोनोमिक्स कि जरा भी समझ नही है. बिल्डर्स तो अपना माल बेचेंगे ही नही. जब बेचेंगे तब पूरे टेक्स के साथ बेचेंगे. उनको क्या दिक्कत है? वो माल का दाम क्यो घटायेंगे? घर कैसे सस्ते हो जायेंगे? घर सस्ते करने का एक ही इलाज है. सरकार ने बहोत बडे पैमाने पर अच्छे और सस्ते घर बनवाकर देने चाहिये. आज की प्रचलित योजनाको चार सौ गुना बढाइये. फिर कानुनन बिल्डर का बिजनसही गैर कानूनी करार दिजिये. और रस्ते, ब्रिज के जैसे घर बांधने का काम भी सरकार ही करेगी. ना रहेगा बास ना बजेगी बासुरी.

बेंकोमे धांधलिया जब बढ गयी थी तो स्वर्गिय इंदिराजीने उनका राष्ट्रियीकरण किया था. आपको भी रीयल इस्टेट के काले धन को खत्म करना है तो उसका राष्ट्रियिकरण किजीए.

अब समस्या आयेगी किसानोंके लिये. क्योंकी हमारा किसान परम्परा पसंद है. वो खेती भी परम्पारिक रितीसे करता है. इसीलिये वो रोकड व्यवहार की परम्परा मे ही विश्वास रखता है. अब कुदरत तो मोदिजी के पचास दिनोंका इंतजार नही करेगी और समय से खेती के काम नही हुए तो हमे खाने के लिये अनाज नही मिलेगा. किसानोंके लिये बेंक सिर्फ पैसा रखना और खुद निकालने की जगह है. किसानोंका इस विषय मे भरपूर ब्रेन वोश होना जरूरी है. जैसे कि भले किसान के पास स्मार्ट फोन” होगा लेकिन वो सिर्फ कॉल करना और सुनना इसी के लिये उसका इसतेमाल करता है. अगर सरकार ऐसा समझेगी कि स्मार्ट फोन है तो मतलब वो मोदिजी का एप भी डाउंनलोड करके देखता होगा तो आप सच्चाई से मीलो दूर है.

जेटलीजी की दलील है कि आतंक वादी संघठनों ने फ़ेक करंसी मार्केट मे डाली है.. अरे भाई जब आपको मालूम है तो उसका ऑपरेशन किजिये ना... वो तो किया नही. क्या फिरसे दो हजार या पांच सौ के नोट वो लोग डुप्लिकेट नही बनायेंगे?
एक भीषण वास्तव आपकी नजर मे लाना चाहुंगा.. स्वयम जेटली जी और हमारे आर बी आय टॉप ओफिसर्स यह बयान दे चुके है. कि मिशन तो सीक्रेट था फिर भी किसी जगह से 2000 के नोट कि फोटो कही से लिक हो गयी. आप खुद ही बता रहे है कि आपके पास देश कि गोपनियता के पुख्ता इंतेजाम नही है. अब क्या आतंकवादी या पाकिस्तान या चीन के पास हमारे डिजाईंस और सीक्रेट्स नही पहुंचे होंगे? जिनको वो फिरसे डुप्लिकेट करेंगे? क्योंकी इंडिया के पास कोई नयी खोजी हुई प्रिंटिंग टेक्नोलोजी नही है. सभी टेक्नोलोजी पश्चिम के देशोंसे हमने कॉपी की हुई है. अब क्या बार बार नोटोंको पीछे खीचा जायेगा? और देश को लाईनमेखडा किया जायेगा?
क्या आप जानते है, कि आप जिस नेट बेंकिंग कि टेक्नोलोजी के उपर निर्भर है वो एक कवि कल्पना है... दो तीन महिने पहले कुछ हेकर्स ने आपके बेंकिंग सिस्टम पर एक विशाल हमला किया था..जिसमे 32 लाख एटिएम खारिज करने पडे थे. वो हेकर्स तो पार्टि कर रहे होंगे. अब मोदिजी ने तो पूरे देश का पैसा बेंक मे जमा कर दिया..
अब अगर विशाल हमला होता है तो कितनी भयंकर प्रोब्लेम देश और लोगोंके सामने आ जायेगी क्या इसका अंदाजा किसी को है? यहा पर डर से ज्यादा, मै टेक्नोलॉजी के उपर कि निर्भरता के मुद्दे को स्पष्ट करना चाहता हू. अगर आसमान से उल्का गिरकर आपके सेटेलाईट ध्वस्त हो जाय तो नेट कनेक्टिविटी और सोफ्ट्वेअर ओपरेशन कि भयानक समस्या आयेगी. क्या इससे निपटने के लिये जो इंतजाम आपने किये है वो पर्याप्त है? यकिनन इसका जवाब है.. नहीं.
इन सबसे परे, हमारा सम्विधान यह कहता है, कि दस अपराधी छूटे तो चलेगा, लेकिन एक भी निरपराध इंसान को सजा नही होनी चाहिये. लेकिन यहा पर तो कुछ चंद चोरोंकी वजह से पूरे देश को ही चोर कि नजर से देखा गया है. क्या दोष है हमारा कि रेगुलर टेक्स पेअर होने के बावजूद भी आज मेरा देश रुक गया है. अगर आपको मालुम है कि आतंकियोने डुप्लिकेट नोट बाजार मे उतारे है.. तो उनको पकडने के बजाय सवासो करोड भारतियोंको आपने आतंकी समझा. ये तो ऐसा हुआ कि लडकियोंकी छेडखानी होती है तो लडकियोंको घर मे कैद करके रखो. बजाय इसके कि अपराधियों को पकडे. आप ही कहते है, दोस्तों, सवासो करोड देश वासी एक साथ एक कदम चलेंगे तो देश सवसो करोड कदम आगे जायेगा. अब बताइये, सवासोकरोड कदम सहम के खडे है कतार मे. पूरा देश रुक गया है.
हम डेमोक्रेटिक कंट्री मे रहते है. तो व्यापक जन हित मे लेने वाले निर्णय आप अकेले कुछ दोस्तोंके साथ मिलकर कैसे ले सकते है? यह डिक्टेटरशिप हो गयी. आप ही कह रहे है, यह निर्णय चंद लोगोंको मालूम था... यह बात डेमोक्रसी मे विश्वास और आस्था रखने वाली जनता को खटक रही है.
खुद को बडा करने की कोशिश मे आप के निर्णय तानाशाह कि पद्धति से लिये जा रहे है, इसका हमे खेद है. कई बार तो यू लगता है, कि आप खुद ही चाहते है, कि देश मे अराजकता फैले. और अंतिमत: एमर्जेंसी लगाई जाय और आप सही मे तानाशाह बन जाय... Good idea !    

      

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