Pages

Free-English-speaking-(Spoken-English)स्पोकन इंग्लिश-course-on-line-article-2

Free-English-speaking-(Spoken-English)-course-on-line-article-2

क्या आप जानते है, स्पोकन इंग्लिश मतलब क्या? स्पोकन का मतलब सिर्फ “स्पीक” का पास्ट पार्टिसिपल नहीं है. स्पोकन का मतलब है, अनरिटन’. (कृपया डिक्श्नरी देखे)
समुचे विश्व मे स्पोकन भाषा का ही प्रयोग होता है. मतलब कौए कांव कांव करते है, कुत्ते भों भों करते है. सम्पूर्ण विश्व के कुत्तोंकी भाषा एक ही है. जैसे इंडिया के कुत्तेको अमरिका लेकर गये, तो अमरिका के कुत्तोंके साथ वह घुल मिल जायेगा. उनकी भाषा देश अनुसार बदलती नहीं. केवल मनुष्य यह एक मात्र ऐसी प्रजाती है, जिसने अपने अपने भौगोलिक परिस्थितियोंके अनुसार अपनी अपनी भाषाओंका निर्माण किया है.
यहाँ तक तो ठीक था. लेकिन प्रांतवाद के आक्रमणकारियोंने अपने श्रेष्ठ्त्व को जताने के लिये भाषाओं को भी माध्यम बना दिया. मेरी भाषा श्रेष्ठ तुम्हारी कनिष्ठ ऐसा भेद निर्माण किया. हम शहर वाले है तो हमारी भाषा शुद्ध और तुम गाँव के लोग इसलिये तुम्हारी भाषा अशुद्ध, मै श्रेष्ठ जाती का इसलिये मेरी भाषा सही,तुम नीचली जातीके इसलिये तुम्हारी भाषा गलत ऐसा कुछ समाज मे होने लगा था. लेकिन अब बदलाव आ रहा है.
आप को यह जानकर हैरानी होगी कि, सम्पूर्ण विश्व भर से करिब करिब साढे चार हजार भाषाएँ लुप्त हो गयी है. उदाहरण के तौर पर मागधी, पाली, संस्कृत इत्यादि...भारत देश बाईस भाषा प्रमुख मानता है. यह भाषाएँ ग्रामिण और शहरी ऐसे दो हिस्सो मे बटी हुई है. जहाँ पर ग्रामिण भाषा शहरी भाषा मे विलिनहो रही है, और शहरी भाषा अंग्रेजी मे विलिन हो रही है.
हमारे महा नगरो मे पिछले बीस सालो मे स्कूलोंकी पढाईके माध्यम मे एक जबरदस्त परिवर्तन आया है... और हर विद्यार्थी के पढ्ने का माध्यम इंग्लिश हो रहा है. यह बदलाव इतना तेज है कि अब अठरा साल के अंदर कि युवा पीढी अपनी अपनी मातृभाषा सिर्फ बोल सकते है, लिख नही सकते. अपनी मातृभाषा लिखनेवाली हमारी यह आखरी पीढी है. आनेवाले सौ सालो मे हमारी मातृभाषाएँ लुप्त हो जायेगी. और कुदरत के इस बदलाव को कोइ नही रोक सकता...
इस विश्लेषण के बाद हमें विचलित होने की कोई जरुरत नही है. क्योंकि हमने स्वयम इस परिवर्तन को देखा है. अपनी मातृभाषा कि किताब मे कुछ सौ साल पुरानी रचनाएँ होती है, कुछ पचास साल पुरानी रचनाएँ क्लासिकल रचनाएँ होती है. फिर मॉडर्न रचनाएँ भी रहती है. इसको पढते पढते हमे समझ मे आ जाता है कि हमारी मातृभाषा मे भी कितना बदलाव आया है. फिर, किताबोंकी भाषा और हमारी बोली भाषा इनमे फर्क तो देखिए कितने इंग्लिश शब्द हम इस्तेमाल करते है...यह एक प्राकृतिक बदलाव है.
पोलिटिकल नेतगण इसे पश्चिमी अतिक्रमण कहते है. लेकिन समाजशास्त्र संशोधक इसे मानवी समाज के उथ्थापन की प्रक्रिया मानते है.क्या हम अब पॅण्ट शर्ट नही पहनते है? कहाँ गये धोती कुर्ता या पजामा? क्या हम रोज सुबह उठ्कर चाय नही पीते है? क्या हम बटाटा के व्यंजन नही खाते है. क्या मोबाईल, टि वी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा नही है. यह सब पश्चिमी देशोंकी देन है. इसका एक अच्छा परिणाम ये हुआ कि पहनावे को लेकर हमारे जितने भेदभाव थे उनको हम भूल चुके है.
यह सामजिक विश्लेशण यहाँ पर देने का विशेश कारण है, अगर अंगरेजी बोलने विरोध ह्मारे परिवार मे है, या हमारे दोस्तोंका सहयोग हमे नही मिला...तो हम लाख किताबे पढे उसके बावजूद भी शायद हम इंग्लिश नही बोल पायेंगे. क्योंकि भाषा बोलना एक सामुहीक प्रयास है. अगर हमारे अंगरेजी बोलने का मजाक उडाया जायेगा तो हम कभी भी फर्राटेदार अंग्रेजी बोल ही नही पायेंगे.
इसलिये हमे अपने दोस्तोंका परिवारवालोंका हौसला बढाना चाहिये, जो भी अंग्रेजी मे वार्तालाप करने का प्रयास करेगा. हम वही भाषा बोल सकते है जिसे हम सुनते है. इसलिये अंग्रेजी फिल्मे देखना, इंग्लिश न्युज देखना, ऑडिओ सीडी सुनना यह हमारे जिंदगी का एक हिस्सा होना चाहिये. कुछ लोग इंग्लिश फिल्मोंको गंदा समझते है लेकिन जेम्स बाँन्ड, इंडियाना जोन्स, रॉकी, रेम्बो इन सीरीज की फिल्मे, जॅकी चेन, अर्नोल्ड श्वार्तनॅगर की फिल्मे जरूर बार बार देखे. यह अभ्यास और एंटेरटेन्मेन्ट दोनों देगी.( यहाँ तक की कुछ हिंदी फिल्मे अच्छा संस्कारी इंसान तो देख ही नही सकता) “टाइम्स ऑफ इंडिया” इंडिया टुडे ऐसी पत्रिकाएँ जरूर पढे, ब्लोग्स भी जरुर पढे.
कई लोग पढ पाते है, लिख पाते है, लेकीन बोल नही पाते..यह इसलिये होता है क्योंकि वह बोलनेका प्रयास ही नही करते. सही या गलत इसकी चिंता छोड दीजिये,बोलते रहिये, बोलते रहिये, बोलते रहिये....कामयाबी के लिये तीन चिजे बहोत जरूरी है... पहली है प्रॅक्टिस, दूसरी है प्रॅक्टिस,और तीसरी है प्रॅक्टिस ! प्रॅक्टिस मेक्स अ मॅन परफेक्ट!


No comments:

क्या भूत प्रेत आत्मा की बाधा रेकी या हिप्नोथेरपी से सम्पूर्ण ठीक होती है?

  क्या भूत प्रेत आत्मा की बाधा रेकी या हिप्नोथेरपी से सम्पूर्ण ठीक होती है?   भूत प्रेत आत्मा या यू कहे उसका 'वहम',...