Pages

Ghosts-cure-Bhoot pret ka saaya भूत प्रेत का साया हटाना


किसीके भी घर में भूत प्रेत का साया हो तो निम्नलिखित प्रयोग करें
 १) गृह (वास्तु) पुरुष कि अनुमति के बगैर हम किसी के भी घर में कोई दखल अंदाजी नहीं कर सकते . क्यों कि वास्तु पुरुष के लिए उसकी जगह में रहनेवाले सभी समान होते है. चाहे वह मनुष्य हो या कोई प्रेत आत्मा. लेकिन मनुष्य योनि जब कि सर्व श्रेष्ठ है और नरदेह सबसे शक्तिशाली है इसलिए वह किसीभी प्रकार के देवता के प्रेम के पात्र हो जाता है. इसलिए हम हमें सतानेवाली दूसरी प्रजाति या अन्य योनि के सदस्योंको भगा देते है. लेकिन इस प्रक्रिया में हमें अन्य शक्तियों का सहारा लेना पड़ता है.




२) वास्तु पुरुष कि शांति के लिए किसी भी अमावस को सवेरे आठ बजे से दोपहर के एक बजे तक छोटासा हवन करना जरुरी है. हवन कि प्रक्रिया अत्यंत सरल है. एक धातु के पात्र Any kitchen utensil will do में दस बारा कपूर के टिक्कियां डालकर जलाएं. और बिच बिच में कपूर डालते रहे
अग्नि के लिए निम्नलिखित वस्तुएं स्वाहा कर देनी चाहियें  गाय का घी आधा चम्मच धीरे धीरे डालें अन्यथा अग्नि बुझ जायेगी. याद रहे अग्नि के ऊपर सीधे घी नहीं डाले, बल्कि होम पात्र के साइड वाल्स पर डालें.
फिर चावल के २१ दाने डालें
फिर उड़द कि दाल के २१+ २१= ४२ दाने डाले. पुनश्च कपूर डालते रहिये.
फिर सुपारी का छोटासा टुकड़ा डालिये.
आखर में छोटासा (पिला) लिम्बु डालिये और कपूर डालते रहिये. लिम्बु थोड़ी देर मैं फट जायेगा. ( यह सम्पूर्ण प्रक्रिया एक आदमी कि चिता जलने कि होती है. ) आखिर में हम बहुत कपूर डाल देते है. घर में धुआं धुआं हो जायेगा.
इस प्रक्रिया के दौरान निचे दिए गए मंत्र का जाप करना जरुरी है.

हे आमुष्मिकानिष्ट निवर्तकपी अभिचार प्रत्यभिचारौ
          वारयतुम पापाप्रयोजकमीति
                   तयो : फलतो हिंसात्वेन तदनुष्ठाने
                           प्रायश्चित्तोंक्वेश्च पाप प्रयोजकत्वात

मतलब हम दूसरे कि बुरी आत्मा, ब्लेक मैजिक , हिंसा से मुक्ति पाना चाहते है.
इस प्रक्रिया को तीन मिनिट या ज्यादा से ज्यादा आठ मिनिट लगते है. मंत्र जाप अगर सीडी पर चालू रखकर कोई भी इस क्रिया को करें तो चलेगा.

( लेकिन आग से सावधान रहे. कपूर हायली इन्फलामेबल है. बच्चे इसे खाये ना.  इसे कोई जोर से सूंघे ना. इससे तीव्र गंध आती है इसकी जानकारी विदेश के बच्चोंको जरुर दे)
विधि के दौरान घर के सभी सदस्य हाजिर होना जरुरी है.
३) फिर काले कपडे का ५०० एमएम बाय ५०० एमएम (आधे मीटर ) का टुकड़ा लीजिये. उसे जमीन पर फैला दीजिये. उसके ऊपर हल्दी कुमकुम डालिये और महा मृत्युंजय मंत्र का जाप थोड़े ऊँचे स्वर में शुरू कीजिये मंत्र निचे दिया गया है,

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्  !
 उर्वा रुकमिव बन्धनान मृत्योर्मृक्षीय मा मृतात !

 (  यह मंत्र करने के पश्चात् ॐ नमः शिवाय का मंत्रजाप २१ दिन के लिए उस घर में होना जरुरी है. शाम के वक्त यह मंत्र जाप शिवजी के काले शिवलिंग के सामने करना है. उस वक़्त घर में अगरबत्ती एवं धुप जला लीजिये. धुप ना मिले तो शिवजी को हाथ जोड़कर माफ़ी मांग लीजिये कि हे शमशानों के राजा, हे आत्माओंके स्वामी मेरे पास जो पूजा कि सामग्री है उसे कृपया स्वीकार करें और हमपर कृपा करें.
ध्यान रखिये शिवजी उग्र देवता है, उन्हें क्रोध जल्दी आता है. लेकिन वोह भोले भी है. उन्हें जल्दी प्रसन्न भी किया जा सकता है. हर रोज ॐ नमः शिवाय का मंत्र जाप करने से भुत प्रेत आत्मा भाग जाती है.)
(अगर हम खुद यानि आचार्यजी खुद यह विधि करने जा रहे है तो मन में महा मृत्युंजय मंत्र चालू रखे. और खुद शिवजी के कृपा दृष्टी के पात्र बनें. किसीभी वक़्त अपने गुरु को याद करें और गुरु के सान्निध्य में यह क्रिया करें. किसभी प्रकार का भय मन में ना रखें.)
अब काले कपडे के ऊपर छिला हुआ नारियल रखें.( जिस देश में नारियल ना मिलें वहाँ पर कांच कि बोतल का प्रयोग कर सकते है.बोतल का एअर टाइट होना जरुरी है . उसमें आधा पानी भर दे तो वह नारियल के जैसा ही सिध्ध हो जायेगा)
नारियल के ऊपर हल्दी कुमकुम डालकर उसकी माफ़ी मांग लीजिये और उसे धन्यवाद दे दें.क्यों कि वह हमारे लिए बलि चढने वाला है. फिर उसपर ७ टिकिया कपूर कि डालकर जला दीजिये. अब वह आत्मा नारियल या बोतल में चला जायेगा.
(बोतल या नारियल में आत्मा जाने के लिए कुछ मिनिट से लेकर ज्यादा से ज्यादा ७२ घंटे का वक़्त लगता है.लेकिन हमें अब प्रक्रिया के लिए ७२ घंटे रुकने कि जरुरत नहीं है.प्रक्रिया जारी रखें.))

४) फिर नारियल को काले कपडे में लपेटकर पुरे घर के हर एक कोने में से घुमा दीजिये. मतलब एक दिवार को देखा जाय तो ऊपर, निचे, दायें और बाएं ऐसी चार लाइन्स दिखायी देगी. इन लाइन्स परसे नारियल को घुमाना है. हर एक दिवार से ऐसे ही करना है. टॉयलेट और बाथरूम को भी नहीं छोडना है. बाल्कोनी को छोड़ दीजिये. इस प्रक्रिया में वक़्त लगता है. और यह करने पर हलकी सी चक्कर आ जायेगी. बदन हल्का हो जायेगा. डरने कि आवश्यकता नहीं है. कभी कभी साधक को जोर से भूख लगती है. यह सब उन निगेटिव शक्तियों के कारण होता है. ऐसा होने पर साधक को सुला दीजिये. वह एक दो घंटे के लिए सो जायेगा, फिर एकदम फ्रेश हो जाएगा.
कभी कभी यह भी देखा गया है कि साधक कि बॉडी वाइब्रेट होती है या वो मूर्छित हो जाता है. इस वक़्त घबरीये नहीं. शिवजी का मंत्रजाप चालु रखके साधक के सर पर (ब्रम्ह चक्र) आधा ग्लास पानी डाले एवं उसे बचा हुआ पानी पिला दे. साधक होश में आएगा.
५)अब नारियल को कपडे में लपेटकर ऊँची जगहपर बेडरूम में टांग दीजिये.
नारियल को अगले पूनम तक रखे. फिर पूनम को उसे उतारकर नारियल को पानी में बहा दीजिये. और कपडे को घर में जला दीजिये.नारियल फेंकने से पहले उसका धन्यवाद अदा करें.
६) नारियल को कोई फोड़े ना. उसका प्रशाद बनाकर ना खाएं. उसमें अब जिन्न या प्रेत आत्मा है. उससे ना खेले. अगर बोतल है तो बोतल को ना खोले.उसे भी पानी में बहा दे.बोतल फूटने से जिन्न वापस आ सकता है. नारियल के फल को फेकते वक़्त पत्थर पर ना फेके. शहरों में नदी या सागर तट को पत्थर या सीमेंट का पिचिंग किया जाता है तो नारियल इसपर फुट सकता है.कभी कभी नदी में पानी कम रहता है. सावधानी बरत लीजिये.

आचार्यजी से बिनती है, कि इन छोटी लगने वाली बारीकियों को लोगों को समझा दें. हरी ॐ


send an email to
ishwarbhaijoshi23@gmail.com 
whatsapp to 9723106181

No comments:

reiki introduction video