Pages

पुर्व जनम-past life regression..what is past life

पुर्व जनम-past life regression..what is past life

 

 

हम अपनी सोच के मुताबिक खुद को संतुष्ट करनेवाली भविष्यवाणिया कर देते है और ज्यादा बुद्धिमान होने के बावजूद आप गलत फैसला ले सकते है.---

प्राचीन भारत और महान हिंदू सभ्यता का अध्ययन करने से कुछ गूढ विद्याओंका पता चालता है. आज के आधुनिक युग में युरोपियन मंगोलियन वंश के विचारवंतोंने उन्हे पुनरुज्जीवीत किया और उसे अपनी समझ से  नाम दिये. जैसे की हिप्नॉटिझम, रेकी, टेलिपथी इत्यादी इत्यादि...

भारतीय संस्कृति की थोडीसी गडबड यह रही है कि हम किसी भी ग्यान को सायन्स नही बनाते, न ही उसका ठिक ढंग से इतिहास लिखते है. हमने जो लिखा वह "पुराण" लिखे है और पुराणों को आधुनिक युग में सायन्स नहीं माना जाता न ही पुराण की बातोंको आप "प्रुव्ह" कर सकते है.

इतिहास लिखने का मुख्य आधार होता है तारिख लिखना और सही कालमापन करना इन दोनों चीजों में हम कमजोर पड जाते है. इसलिये हजारों वर्षों से जो ग्यान भारत देश में चला आया वह बीसवे शताब्दी तक या तो पिछड गया या तो नष्ट हो गया.

इसका मुख्य कारण यह था कि पश्चिमी देशोंमें "इंडस्ट्रिअल रिवोल्युशन" आया. इस 'रिवोल्युशन' के तहत अनेक यंत्रोंका अविष्कार हुआ. मेडिकल सायन्स प्रगत हुआ मानस शास्त्र प्रगत हुआ. पुराण शास्त्र और आधुनिक सायन्स इनमें दरार पडने लगी. क्योंकि सायन्स कहने लगा कि प्रुफ दिखाओ और बार बार सिद्ध करके दिखाओ जिसका परिणाम हर बार एक जैसा ही  आना चाहिये. इसी के कारण हमारे प्राचीन शास्त्र पिछड गये. इसके, सम्पुर्ण मानव जाती पर सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम हुए.

सकारात्मक असर- हम अनेक वंश के इंसानोंको बेहतर समझने लगे. नकारात्मक असर-  हमने अंधश्रद्धा के साथ साथ पुरातन विद्याओंको भी त्यागना शुरु किया और जो कुछ पश्चिम से आता गया उसे हम ऑख मूंद्कर फॉलो करने लगे. जिसकी वजह से मन से जुडे हुये शास्त्रोंको हमने सिखना बंद कर दिया.लेकिन उन्ही शास्त्रोंको पश्चिम के विचारवंतोनें पुनरज्जिवित कर दिया; फिर उन्हे भारत लौटाया. अब भारतिय लोग उन पुनरज्जिवित विद्याओंको सीख रहे है.

हम यहाँ पर चर्चा करेंगे वशिकरण,टेलिपथी, कर्ण पिशाचिनी, हिप्नॉटिझम, रेकी, पास्ट लाइफ रिग्रेशन और ऐसेही अन्य शास्त्र, जो मन से जुडे हुए है.

इस प्रकार के गूढ शास्त्रोंको सिखने के बजाय और सच्चाई जाने बगैर स्वयंघोषीत विचारवंत सिधा सिधा उन्हे झूठा साबित करने मे ही अपने जीवन को धन्य मानते है. हॉ, इन शास्त्रोंको बदनाम करने का काम गली कुचे में दुकान खोलकर बैठे पाखंडि एवम ढोंन्गी 'बाबा'लोग कर रहे है.

जब कोई धेय्य हर प्रकार कि मुमकिन कोशिश के बाद भी फल प्राप्ती तक नहीं पहुंचता या जिसका उत्तर मेडिकल सायन्स नहीं दे पाता ऐसे परेशान लोग इन ढोंगी बाबाओंके चंगुल में फसते है. परेशान लोगोंकी मानसिकता का गलत फायदा यह बाबा लोग उठाते है. लेकिन क्या इन चंद गलत लोगों की वजह से हमारी प्राचिन भारतिय सभ्यता का यह ग्यान भी गलत साबित हो जायेगा?

बिलकुल नहीं.

अगर समाज को मांत्रिक तांत्रिक और पाखंडि लोगों के चंगुल से बचाना है तो इन पुरातनशास्त्रोंका संशोधन और संवर्धन होना समय की मांग है.सायंटिस्ट माइंड रखनेवाले शोध कर्मियोनें हमारे पुराने ग्रंथोंको पढना जरुरी है.उनमें संशोधन करके आज के युग के अनुसार उनका मतलब लगाना जरुरी है. इन शास्त्रोंको आज के लाइफ स्टाइल अनुसार जीवनउपयोगी बनाना बेहद जरूरी है. कुल मिलाकर अच्छे लोगोंका सामने आना जरुरी है. वरना बुरे लोग ताकतवर बन जाते है.

इन गूढ शास्त्रोंके रिझल्ट्स हर साधक और गुरु के अनुसार बदल जाते है, इसे ध्यानमे रखना जरुरी है. इन शास्त्रोंको गुरु शिष्य परम्परा से ही सिखाया जाता था. इसालिये ये विद्यायें गुरु के आधिन होकर रह गयी. मतलब जब ग्यान देनेवाले गुरु मर गये तब विद्यायें भी मर गयी. या किसी गुरु ने सम्पुर्ण ग्यान होते हुये भी शिष्योंको सम्पुर्ण ग्यान नहीं दिया तो भी ये विद्यायें नष्ट हो गयी. यह अच्छा भी हुआ और गलत भी.

आज हम चर्चा करेंगे “पास्ट लाईफ रिग्रेशन “ की. इसका मतलब है हमारे पुर्व जनम की सैर करना.इसे जानने से पहले हमे कुछ बातें याद रखना जरुरी है. पास्ट लाईफ रिग्रेशन कोई मनोरंजन की वस्तू नहीं है. उपर् वालेने हमें पैदा किया उस वक्त हम अपने पालनेमे ही चौबिसो घंटा सोते है. हमारा पिशाब,संडास सब बिस्तर पर ही हो रहा है. धिरे धिरे हमे चलने कि क्षमता मिली फिर दौडनेकी…. हमे देखने, सुनने समझनेकी ताकद मिली.फ़िर जवानी ढलते ही धिरे धिरे उपर् वाला हमसे ये क्षमतायें वापस लेने लगता है. समझनेकी क्षमता, सुनने देखनेकी क्षमता को वह हमसे धिरे धिरे छीन लेता है. फिर हमारे मूवमेंट को वह कम कर देता है. जिंदगी उलट दिशा मे जाने लगती है. दौडनेकी, चलने कि क्षमता वह कम कर देता है अब हम चौबिसो घंटा बिस्तर पर सोते है. पिशाब,संडास सब बिस्तर पर होता है. और एक दिन वह हमारी आत्मा को शरीरसे निकाल देता है. इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में इस जनम का हमें अगले जनम में कुछ भी याद ना रहे ऐसी योजना उपर वालेकी होती है.

लेकिन पास्ट लाईफ रिग्रेशन में जाकर हम उसके काम मे दखल अंदाजी करते है, ये ध्यान मे रखिये. उपर वाला यह चाहता है की हमे हमारा पुनर् जनम याद नहीं रहे. इसलिये शुरुआतमें ही हमने यह स्पष्ट किया है कि यह कोई मनोरंजन की वस्तू नहीं है. तो फिर इसे क्यो किया जाता है?

बहोत बार यह देखा गया है की कोइ इंसान बहूत ज्यादा मेहनत करता है फिर भी उसे कामयाबी नही मिलती, पति पत्नी मे अंनचाहे झगडे होते है. कोई रिश्तेदार बिना वजह परेशान करता रहता है. कुछ अंनजानीसी बिमारी आ जाती है, जिसके उत्तर इस जनम में नहीं मिलते उस वक्त पास्ट लाईफ रिग्रेशन का सहारा लिया जाता है.

जब गुरू यह प्रक्रिया किसी के उपर करता है तब सावधांनता पुर्वक इसे अंजाम दिया जाता है. गुरू बनने के लिये मृत्युंजय मंत्र का जाप सात लाख बार करना जरूरी है. क्योंकी हम लोगों को मृत्यु दिखाते है, उस वक्त लोग डर जाते है. इस जनम मे हम उनकी आयु छोटी छोटी करते है, फिर साधक मॉ के गर्भ मे चला जाता है.अब उसे पिछले जनम की मृत्यु दिखती है, फिर पिछला जनम उलट काल में दिखने का काम शुरु होता है. इसी वक्त मृत्यु देखकर साधक डर जाते है. मृत्यु के भय के उपर काबू पाने के लिये गुरू को तय्यार रहना पडता है. नही तो साधक की जान भी जा सकती है.

कभी कभी साधकको सिर्फ अंधेरा दिखाई देता है, चाहे गुरू एक घंटे की प्रक्रिया करें. ऐसे साधक का पुर्व जनम ऐसी धर्म या जाती मे हो सकता है जहा पर लाश को मट्टी मे दफनाया जाता है. उसकी आत्मा इस कदर डर जाती है की वह अमुक एक जगह (कब्र)से हिलना नही चाहती. ऐसे आत्माओंकी अकाल मृत्यु हो गयी होगी. जिसके कारण रुह भी काप जाना यह शब्द प्रयोग आगया होगा. उस भयानक बात को उन साधकोंकी आत्मा पुन्ह एक बार अनुभव नही करना चाहती है.

कभी कभी साधकको चीजे साफ साफ नजर नही आती. उस समय समझ लिजिये की पिछ्ले जनम मे वह बहोत लम्बी उमर के लिये जिया था. करिबन सौ साल.इसलिये अगर उनकी दृष्टी सत्तर साल मे ही खराब हो गयी थी तो करिबन तीस साल का फासला तय करेंगे तोही पिछ्ला जनम नजर आ सकता है.

एक ही झटके मे कभी भी साधक को पिछले जनम मे नही लेकर जाना चाहिये. ऐसा करने पर किसी किसी साधक का सर दर्द करने लगता है और माथा भारी हो सकता है. धीरे धीरे अगर पिछला जनम दिखाया जाय तो साधक उसे एन्जॉय कर सकता है.

गुरू के हाथ मे साधक को पिछले जनम मे लेके जाना होता है लेकिन उससे निकलने वाले सकारात्मक या नकारात्मक दोनो परिणामोंके लिए साधक स्वयम जिम्मेदार होता है. कई बार पिछला जनम सुंदर होनेके कारण साधक की आत्मा इस जनम मे नही आना चाहती जिसके परिणाम गम्भीर हो सकते है. कई बार साधकको जो लोग दिखते है उनके प्रति ज्यादा प्रेम निर्माण होता है, फिर वह उनसे मिलने जाता है और पिछला जनम और ये जनम के रिश्तेदार इनमे खिचाव पैदा होता है.लोग फिर पिछले जनम के आर्थिक व्यवहार या अधूरी प्रेम कहानी को अब पूरा करने की कोशिश करते है और अच्छी जिंदगी बर्बाद होते देर नही लगती. यह सजा उपरवाला हमे देता है, इसे ध्यान मे रखे.

फिर भी पास्ट लाईफ रिग्रेशन का ग्यान रखना जरुरी है. यह डॉक्टर बनने जैसा है. जो इनसान मुसिबत मे होगा सकी आप इसके तहत मदद कर सकते है. या अपने आप के लिये इस थेरपी का उपयोग जरूर कर सकते है. शास्त्रोंकी मान्यता अनुसार दूसरोंसे थेरपी लेने के बजाय अपनी मदद खुद करे इसी मे पुरुषार्थ है. हरि ॐ. 


No comments:

reiki introduction video