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A Day out with family at Umargam


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Umargam

उमरगाम समुंदर किनारा.. जन्नत का नजारा

उमरगाम समुंदर किनारा..जिसकी पहचान है, "रामायण" और "महाभारत" इन लीजंडरी टी.वी. सिरियल्स के शूटिंग के लिये. क्या आपको मालूम है, इंडिया का सबसे 'वर्जिन' समुंदर किनारे का सम्मान इसे प्राप्त है. क्या होती है 'वर्जिन बिच'की परिभाषा? 'वर्जिन किनारा' उसे कहते है जिसे लोगोने प्लास्टिक एवम काच की बोटले डालकर खराब ना किया हो, स्थानिक लोग जिसका उपयोग सुबह में 'प्रसाधन गृह' के रूप मे ना करते हो, जहाँ पर असामाजिक तत्व जैसे चोर, उचक्के अनचाही औरते ना हो. और जो प्राकृतिक रूप से खतरनाक ना हो. जहाँ जरूरत से ज्यादा भीड ना हो.
'उमरगाम', वलसाड डिस्ट्रिक्ट मे सूरत से अढाइ घंटे की दूरी (करीबन 150 कि.मी.) पर है. वन डे ट्रिप के लिये यह आपका सही चुनाव होगा, अगर आपको समुंदर कि लहरे, उनमे तैरना या सनसेट पसंद हो. 
'सुवाली, डुमस, दमन, उभराट' ये भी पर्यटकोंकी पसंद है. लेकिन इन सबके माईनस पोईंट की भी हम बात करेंगे. सुवाली बीच प्राकृतिक रूप से अत्यंत खतरनाक है. यह किनारा हाजिरा के नजदीक है. लेकिन भूल से भी यहाँ पानी मे ना उतरे. पानी मे भँवरा है, बडे बडे पथ्थर है. बहोत बडा बोर्ड यहाँ पर आपका स्वागत करता है,कि यह बिच भयजनक है. डुमस का किनारा असल मे किनारा है ही नहीं. भयानक काले प्रदुषित किचड से सना हुआ यह 'बीच' स्थानिक नाश्तागृह वालोने समुंदर मे अतिक्रमण करके कुदरत के सुंदर गालपर खरोच खींचा है. डुमस मे आप सन सेट का प्राकृतिक आनंद उठा ही नही सकते, क्योंकि चार बजे से ही हाजिरा के इंडस्ट्रीज की फ्लड लाईट्स शुरु हो जाती है. दमन मे शराब पीने हेतु आने वाले पर्यटक ज्यादा होते है. उभराट मे बाकी सब तो ठीक लेकिन 'अ-सामाजिक तत्व' आपको डिस्टर्ब करते है. अनेक झुग्गियाँ, झोपडियों में दिन दहाडे 'देह विक्रय'होता है. भूल से भी टीन एजर बच्चोंको यहा अकेले ना छोडे.
उमरगामके किनारेकी रेत सुनहरे भूरे रंग की है. और स्थानिक लोग सोने जैसे. गोवा मे जिस प्रकार सम्पूर्ण सुनहरे रंग की रेत मिलती है, यहाँ पर सफेद चंदेरी रंग रेत मे ज्यादा है. स्टुडिओ के पास का साफ सुथरा जंगल देखने लायक है. अगर नसीब हुआ तो कोई ना कोई शूटिंग देखनेके लिये जरूर मिलेगी. सवेरे छ बजे निकलिये, अगर फोर विलर नही है, तो ट्रेन पकड लिजीये. बहोत सारी फास्ट ट्रेने यहाँ पर रुकती है. स्टेशन से आपको शेअर रिक्षा मिलेगी जो 'गाम' मे लेकर जायेगी. उमरगाम एक तहसील प्लेस होने के बावजूद यहा का मार्केट ज्यादा बडा नही है. इसीलिये स्टेशन पे ही नाश्ता किजिये, और पार्सल लिजिये. अगर फोर विलर है तो सनसनासन करते सूरत मुम्बई मेगा हायवे से वापी तक बिंदास्त जाइये. अब वापी के बाद आपको भिलाड से राईट मे मुडना है. कही पर भी भिलाड का बोर्ड नही है. भिलाड कि पहचान, एक मिडल साईज मंदिर लेफ्ट साईड मे मिलेगा. वहीं राईट साईड मुडना है. एक रेल्वे क्रोसिंग मिलेगा, फिर संजाण होकर आप उमरगाम आधे घंटे में पहुँचते हो. संजाण गाम पारसीयोंके लिये बहोत ऐतिहासिक है. पारसी लोगोंकी 400 फेमिलीज जो भारत मे पहली बार उतरी वो संजाण इलाका था. इसलिये संजाण, देहरीमें (उमरगाम के पास) प्राचिन अग्यारी (पारसीयोंके पवित्र धर्मस्थल) आपको मिलेगे.
उमरगाम एक शांत और प्राचिन गाम है. जैसे ही संजाण की नदी आप क्रोस करते हो समुंदर कि मछली के साथ की खारी हवा आपको उत्तेजित करती है. हाँ, उमरगाम और नारगोल दोनो मछलियाँ पकडनेवाले लोगोंके गाँव है. थोडे ही समय मे आप समुंदर के किनारे होंगे. यहाँ मुम्बई की तरफ से भी सैलानी आते है. अब तक साढे दस ग्यारा बज चुके होंगे.
अपने पैर से जूते चप्पल निकालकर महीम रेत पर चलने का आनंद उठाईये. थोडे पानी के अंदर खडे रहते ही छोटी लहरोंके साथ बारिक रेत के कण आपके तलुओंको गुदगुदानेका काम करेगी. नेट पर ज्वार भाटा (हाइ एण्ड लो टाईड) का समय देख लिजिये. अगर आपको गहरे पानी मे जाना है, तो 'लो टाईड' मे अंदर जाने से जान का खतरा हो सकता है. करीब करीब एक किलोमीटर तक हल्के स्लोप वाला यह किनारा, 'सुवाली' बीच से ज्यादा सुरक्षित है. भिखारी, चोर उचक्के, गलत औरते, शराबी मनचले  यहाँ नहीं मिलेंगे. प्राचिन गाँव होने के कारण यहाँ कि संस्कृति इसे पवित्र फेमिली स्पोट बनाती है.
धार्मिक लोग यहाँ के गणपती मंदिर मे अवश्य जायें. कहते हैं इसे छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रधान 'पेशवा' ने इसे बनवाया था. इस मंदिर मे बहोत ज्यादा लकडी का काम किया हुआ है, और इसकी विशेषता ये है कि मंदिर कि मुख्य गणपतीजी की मूर्ति "लकडी" कि है. यह अद्भुत मंदिर है. अगर समुद्री सफर का मजा लेना चाहते हो तो मंदिर के पास से छोटी छोटी नाव हायर किजीए या किनारे कि उस तरफ नारगोल और फिर उमरगाम ऐसा चक्कर लगाईये.
दोपहर का खाना खा लेने के बाद थोडा आराम किजीए. लेकिन 'सन सेट' (सुर्यास्त) देखे बगैर लौटने का पाप ना किजिए. उमरगाम का सूर्यास्त एक विशाल कवि कल्पना है. शाम को चार बजे के बाद सुरज कि किरणे ठण्डी पडने लगेगी. हाँ, बच्चे एवम बुजुर्गोंके कान जरूर ढक दीजिये. क्योंकि यहाँ हवा मे नमी ज्यादा है. और हवा किसी भी मौसम मे बडी तेज और लगातार चलती रहती है. खुष्क मौसम मे बच्चोंके कान मे हल्की सी महीम रेत भी जायेगी. थोडी सावधानी बरतें ज्यादा चिंता ना करे. शाम को यहाँ साढे पाँच के करीब सूर्य डुबने लगता है. और पौने छ के करीब डूब जाता है. ऐसा इसलिये क्योंकि हवा मे नमी ज्यादा होने के कारण बादलों जैसे एक बहोत गाढी लेयर समुंदर के उपर रहती है.
कई बार डूबता सूरज दो हिस्से मे दिखता है. कई बार घडे के आकार जैसा दिखता है. कई बार आईस्क्रीम के गोले जैसा ठण्डा दिखाई देता है. इसे जरूर केमेरे मे कैद किजीये.
इन यादगार पलोंके साथ शाम का गरम गरम नाश्ता कहीं पर किजीये. और फिर सूरत के लिये निकलिये. ठण्डी हवा लगने के कारण बच्चे (बुजुर्ग भी) गाडी मे तुरंत सो जायेंगे. कुदरत के साथ एक नया रिश्ता बनाकर मन कि अपार शांति मिलेगी. सुरक्षित ड्राईव करते हुये आराम से नौ बजे तक आप सूरत पहुँच जायेंगे.. 
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