Pages

Gira waterfall in Saputara


Gira waterfall in Saputara





"गिरा" वाटरफाल इन सापुतारा

धो धो धो..घनगम्भीर आवाज..छोटे छोटे पानी के कण हवा के साथ सैर करते हुये आपकी नाक कान को गुदगुदाते हुये..मुलायम स्पर्श करती हुयी ठंडी हवा.. यह रोमांच है "गिरा" वाटरफाल का. इंसान और पानी का बहोत गहरा रिश्ता है. बिलकुल काले घने बादल तेज बरसात, समुंदर कि तेज लहरे या बडे झरने का अखंड प्रकोप...इंसान का मन इससे प्रफुल्लित हो जाता है. चाहे आप बिजनसमन हो या नौकरी पेशा, चाहे आप विद्यार्थी हो या फेमिलीमन हर किसी को अपने अपने जीवन मे कुछ न कुछ स्ट्रेस जरूर रहता है. ऐसे मे जरूरत है हमे रिलेक्स होने की.. और रिलेक्स होने के कुछ कुदरती तरीके मौजूद है, इनमे ही एक है "गिरा" वाटरफाल! सूरत शहर से महज तीन घंटे कि दूरी पर (160 कि.मी) है यह मन को तरो ताजा बनानेवाला कुदरत का चमत्कार. 'वन डे' ट्रिप के लिये अत्यंत सुंदर जगह.

कोमल हरियाली और आदिवासी "वाघई" इलाके में बहता यह झरना (सिर्फ मोन्सून मे 15 जुलाई से 10 सितम्बर ही) बार बार देखने लायक है. सवेरे सात बजे के करीब हम निकले तभी हल्की हल्की बरसात हो रही थी. याद रखिये कि कुदरती जगहोपर शहर कि सुविधाये अक्सर नही मिलती. इसीलिये अपनी आराम दायक चीजे साथ रखिये. जैसे कि भरपूर गरम गरम चाय गरम गरम नाश्ता, पानी, थरमस मे घर से ही ले लिजिये. दोपहर के भोजन का टीफ़िन भी घर से ही ले लिजिये.बदलने के लिये सुती वस्त्र, टुवाल, अगर दस साल से छोटे बच्चे या कोई बुजुर्ग है तो लपेटने के लिये 'शॉल'. क्योंकि शहरवासियोंके लिये यहाँ भीगने के बाद अचानक ठंड लगती है. सर्दी, खासी, उल्टी, दस्त की गोलियाँ फर्स्ट एड का सामान साथ मे रखिये. (आपको नही तो शायद किसी और को इसकी जरूरत पडे.) और हाँ एक प्लास्टिक कि चटाई और उतनीही बडी तालपत्री ले लिजिये.

शहर की भीड्भाड से दूर अब ट्रेफिक की आवाज कम होने लगती है. फिर पलसाणा का हायवे पकडतेही गाडी हवासे बाते करने लगेगी. बच्चे बीच मे ही सू सू करने के मूड मे आ जाते है. इस रूट पर एक भी अच्छा 'होटल' धाबा नही है. इसीलिये आराम से कही पर गाडी रोकिये. पलसाणा चोकडी से राईट मुडकर खरेल- टंकेल- रणकुवा रोड पर आ जाते है. इस रास्ते पर हर दस किलोमिटर पर अच्छे होटल्स है. तब तक एकाध घंटे का सफर हो जाता है. फ्रेश होकर आगे कि सफर जारी रखिये.. खरेल से लेफ्ट मुडकर टंकेल पर फिर रणकुवा, हमुमांनबरी, वाघई रोड और नवसारी एग्रिकल्चरल युनिवर्सिटी से पहले राईट मे छोटा रस्ता मिलेगा. बस अब हम गाडी जानबूझकर स्लो रखेंगे.
सभी कांच खोल दीजिये.. ठंडी पवन अपके रोम रोम को जगा देगी. अपने अपने कामो मे व्यस्त आदिवासी दिखाई देंगे. अब तक साढे दस ग्यारा का टाईम हो रहा है.. और अचानक जोर जोर से गूंजनेवाली आवाज सुनाई देगी और चंद मिनिटो मे आप "गिरा" झरने के पास पहुँच जाते है...

गाडी पार्किंग, या वोशरूम यहाँ नही है. लेकिन कुदरत का नायाब करिश्मा अब आपके समने है. उपर काले बादलोंसे घिरा पिघलता हुआ आसमान.. रप रप टप टप गिरती बडी बडी बूंदे.. ठंडी हवाएँ और यह बहोत विशाल झरना.. महसूस होता है, हम इंसान कुदरत के आगे कितने छोटे है. बच्चोंकी किलकारियाँ भिगे बदन. बुजुर्गोंसे नजरे चुराकर पति-पत्नी का एक दूसरे को हल्का सा प्यार भरा होनेवाला स्पर्श.. हर कोई घरेलु चिंताओंसे मुक्त, अपने आपकी 'स्पेस' ढूँढता हुआ..अब थोडी ही देर मे तेज भूख लगती है. अच्छी हरीयाली देखकर तालपत्री और उसपर चटाई डालिये. घर से लाया हुआ गरम गरम नाश्ता और भिगे बदन गरम गरम चाय की चुस्कियाँ आपको स्वर्ग सुख का एहसास दिलाती है. जगह देखकर थोडे शांत पानी मे पैर डुबोकर बैठ जाईये. छोटी छोटी मछलियाँ आपके पैर को चूमने का काम करेगी और स्पा मे मिलनेवाला "फिश पेडिक्युअर' नेचुरली, फ्री मे मिलेगा.

यहाँ स्थानिक प्रशासन झरने के अंदर जाने नही देता. क्योंकि उपर से पानी के साथ पत्थर गिरते हैँ. और नीचे पानी के भवँरे हैं. कई बार पहाडी पर बारिश ज्यादा हुयी तो अचानक बाढ का खतरा हो जाता है. कई सैलानी 'दारू' (बियर) पीने का प्रयास करते है, तो उनको भी  स्थानिक प्रशासन रोकता है. प्लास्टिक कि बोतले, पेक फ़ूड कि पेकेट्स कृपया यहाँ ना फेकें ये लोग बहोत गरीब है, लेकिन कुदरत इनके उपर मेहेरबान है. तो अपने शहरीपन की अमीरी का कूडा कचरा यहाँ ना फेके.
सैलानीयोंके लिये भुट्टे गरम करके बेचनेवाली कुछ मातायें मिलेगी जिनके साथ एक दो साल का बच्चा हो. उनसे 'बारगेन' ना करते हुये भुट्टे खरिदिये. आपकी वजह से शायद उन्हे रात कि रोटी नसीब हो...

तीन बजे के करीब वापस निकलिये एक यादगार दिन के साथ. http://ideazunlimited.net http://ideazunlimited.net

No comments:

reiki introduction video