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Travelling destination KUBER BHANDARI MAHADEV MANDIR



KUBER BHANDARI MAHADEV MANDIR

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Kuber bhadari



सूरत शहर से महज साढे तीन घंटे कि दूरी पर (180 किलोमिटर) है, कुबेर भंडारी महादेव मंदिर. सूरत से बडौदा शहर के हायवे पर करजण चार रस्ता से दाहिने मुडने पर करीब तीस किलोमिटर पर करनाळी गाव आता है, जो नर्मदा नदि के किनारे पर है. यह ग़ाव हमारे आदरणीय वित्त मंत्रि जेटलीजी ने (अडोप्ट) दत्तक लिया है. जब मुख्य हायवे से हम अंदर मुडते है, तो रस्ता इतना खास नही है. करनाली पहुंचने के लिये आपको बडौदा जाना होगा. फिर बडौदा से बस एवम प्राइवेट वेहिकल्स मिलते है. बडौदा सिटी से लगभग अस्सी किलोमिटर कि दूरी पर करनाली है. कुबेर भंडारी महादेव मंदिर नर्मदा नदी के इस पार है, और छोटी नाव मे स्वार होकर नदी के उस पार जायेंगे तो सामने चाणोद है. तो एक ही दिन मे आपको दो तीर्थ स्थानोंका दर्शन मिल सकता है.
हर अमावस को यहा पर जबर्दस्त मेला लगता है. जिसमे कई बार तीन से चार किलोमिटर दूर तक दर्शन के लिये लाईन लगी रहती है. लेकिन यहा पर लाईन मे खडे भक्तोंको कम दाम मे पानी एवम नाश्ता उपलब्ध किया जाता है. रास्ते मे कुछ स्थलों पर मुफ्त मे भंडारा भी किया जाता है. जिसकी क्वालिटी अच्छी होती है.
सम्पूर्ण गुजरात से ही लोग यहा पर आते है ऐसा नही है, मध्य प्रदेश राजस्थान महाराश्ट्र और कई बार तो केरल से भी लोग यहा पर आते है. जितना यह मंदिर गुजरात मे पोप्युलर नही है उतना यह बाकी के राज्योन्मे पोपुलर है.
जो भक्त कुबेर भडारी के दर्शन के लिये जायेंगे उनके लिये खास सूचना यह है, कि यहा पर पेण्ट पहने हुये पुरुषोंको एवम महिलाओंको दर्शन कि इजाजत नही है. इनकी लाईन अलग होती है. पुरुषोंसे निवेदन है कि वो धोती पहनकर जाये और महिलाये साडी पहनकर जाये, या पंजाबी सलवार कमीज. नही तो आपको दर्शन अंदर तक ना मिलने पर घोर निराशा होगी.
अगर आप अमावस को नही गये तो यह मन्दीर घूमने जैसे है. यह लगभग चार सौ साल प्राचीन है. इसकी सीढीया बहोत उंची है, बुजुर्गोंको सम्भालिये. मंदिर को लगकर ही एक और एक प्राचिन मंदिर है उसके अंदर गुफा है जो देखने लायक है. कोई महात्मा इस गुफा मे बैठकर ध्यान करते थे.
एक विशाल पेड के नीचे स्वयम्भू बारा ज्योतिरलिंग है, वो नजारा भी अदभुत है. दर्शन के बाद या उससे पहले नर्मदा नदी के दर्शन किजिये. सीढीया ज्यादा उंचाईवाली है, जरा सम्भलकर. छोटी नाव मे सवार होकर नदी के बीच मे जाइये उसे त्रिवेणि संगम कहते है. यहा पर अनेक छोटे छोटे शिवलिंग के आकर के पत्थर मिलेंगे उन्हे लोग ले जाकर शिवलिंग के जैसे पूजते है.
यहा रास्ते पर बीच बीच मे अमरूद बेचनेवाले आदिवासी मिलेंगे, ये एक्दम गाव के अमरूद है, जरूर लीजिये. और यहा पर 'कवठ' नाम के मीठे खट्टे फल मिलेंगे उनमे मसाला डालकर खाने का मजा कुछ और ही है. कवठ और अमरूद आप जरूर साथ लायेंगे.
करनाली विजिट ना केवल धार्मिक विजिट है, यह एक शांत और कुदरत के करीब ले जाने वाला सफर है.
शाम लगभग चार बजे के करीब आप निकलेंगे तो रात के खाने तक आप वापस सूरत पहुंच सकते है.    
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